Thursday, October 30, 2008

दूसरों की मातृभाषा का अनादर न करें – अमिताभ बच्चन

 

मुंबई। हिन्दी में ब्लॉग लिखने को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया से
रूबरू हो रहे महानायक अमिताभ बच्चन ने साफ किया है कि वे अपनी भावनाएँ मातृभाषा में
व्यक्त करने से नहीं हिचकेंगे।


श्री बच्चन मातृभाषा के प्रति उद्गार व्यक्त
करते हुए ब्लॉग में लिखते हैं - "यदि मुझे अपनी भावनाएँ मातृभाषा में व्यक्त करने
का अवसर मिलता है तो मैं ऐसा करने से नहीं हिचकूँगा। भले ही उसे कोई पढ़े या न पढ़े।
मैंने हमेशा ही अपने जीवन और व्यवहार में संतुलन बनाए रखा है। यह आगे भी बना
रहेगा।" उन्होंने लिखा है - हम कभी भी अन्य लोगों की मातृभाषा का अनादर नहीं करें
और न ही उनके विश्वास और महत्व का। मेरे हिन्दी में लिखने को लेकर आप में से कई
लोगों को विस्मय हो सकता है। कुछ लोग इसका अनुवाद चाहते हैं और कुछ ने तो ब्लॉग
पढ़ना छोड़ देने तक की चेतावनी दी है। जबकि कुछ पाठकों ने हिन्दी में लिखने के लिए
आभार भी जताया है। इनमें अहिन्दी भाषिक भी हैं, जिनका हिन्दी से कोई परिचय नहीं है।


कुछ नहीं छूट रहा

उन्होंने अहिन्दी भाषी पाठकों को आश्वस्त करते हुए
कहा कि निष्पक्ष भाव बनाए रखने के लिए निश्चित रूप से पुनरावृत्ति होगी। कथ्य समान
रहेंगे। इससे उन्हें आशा है कि सभी चर्चा और आशंकाएँ समाप्त हो जाएँगी। उन्होंने
कहा कि जो कुछ हिन्दी में कहा गया है, वह पहले अंग्रेजी में आ चुका है। इसलिए
पाठकों से कुछ नहीं छूटेगा।


छोड़ना चाहें तो आपकी मर्जी

उन्होंने
कहा- "आप सभी अपनी इच्छा से मेरे ब्लॉग पर आते हैं। मैं आपकी उपस्थिति का मजा उठाता
हूँ। आपकी प्रशंसा और आलोचनाओं को मैं लोकतांत्रिक तरीके से लेता हूँ। फिर भी यदि
आप मेरा ब्लॉग छोड़कर जाना चाहते हैं तो मैं आपको रोकने वाला कौन होता हूँ।"

(दैनिक 'नयी दुनिया के 30 अक्तूबर (जबलपुर संस्करण) से साभार)

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